मुझे खुदा बना दिया
आरजू-अ-जिंदगी कि मुझको कोई खुदा कहे,
जवाब था,जब पुछा !
मैं आहत जब टूटते सपने,
वो खोजे भीतर जवाब अब भी,
टटोले मेरे टुकड़े!
रौशनी से चुंधियाती आँखें उसकी,
मेरे भीतर जिसकी लौ जली थी!
जिंदगी है अब भी मुझमें,
वही जन्म लेता इंसान मेरे भीतर!
कहकर कि
इंसान है तेरा अंश
अ खुदा मेरे,
तुने मुझे खुदा बना दिया !
Gunj Jhajharia
जवाब था,जब पुछा !
मैं आहत जब टूटते सपने,
वो खोजे भीतर जवाब अब भी,
टटोले मेरे टुकड़े!
रौशनी से चुंधियाती आँखें उसकी,
मेरे भीतर जिसकी लौ जली थी!
जिंदगी है अब भी मुझमें,
वही जन्म लेता इंसान मेरे भीतर!
कहकर कि
इंसान है तेरा अंश
अ खुदा मेरे,
तुने मुझे खुदा बना दिया !
Gunj Jhajharia
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