शनिवार, सितंबर 28

मुझे खुदा बना दिया

आरजू-अ-जिंदगी कि मुझको कोई खुदा कहे,
जवाब था,जब पुछा !
मैं आहत जब टूटते सपने,
वो खोजे भीतर जवाब अब भी,
टटोले मेरे टुकड़े!
रौशनी से चुंधियाती आँखें उसकी,
मेरे भीतर जिसकी लौ जली थी!
जिंदगी है अब भी मुझमें,
वही जन्म लेता इंसान मेरे भीतर!
कहकर कि
इंसान है तेरा अंश
अ खुदा मेरे,
तुने मुझे खुदा बना दिया !
Gunj Jhajharia

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देखे जा रंग तु ,


इरादें हो अगर आसमानो पर,
मौहल्ले की गली छोटी लगती!
जो सामने हो महल भी,
उसकी नीव कच्ची लगती !!
हुनर चाँद को पाने का,
हर छत से सीढी लगती!
गुब्बारों में भरी हवा
छोटे गालों से ही निकलती!
श्याम रहेगा तो सुंदर भी,
गौर वर्ण से सुर्याश्मी निकलती!!
आह क्या भव्य जग,
जंग भी कर्मभूमि रंगती!!
अब देखे जा रंग तु ,
ये सोच तो दुनिया पलटती!!!! 

कितने दिनों बाद मेरा हिंदी फॉण्ट मिला है!एक कविता तो बनती थी..
अब आपका लाइक भी बनता है!
Gunj Jhajharia

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