मंगलवार, नवंबर 29

मेरे पास आना तुम

तुम जिस दिन हार जाओगे,
तब मेरे पास आना..
मैं समझूंगी 
तुम्हारी हार में छुपे जीत के सन्देश को.

तुम जिस दिन रोना चाहोगे,
उस दिन मेरे पास आना,
मैं दूंगी,
जगह तुम्हे सुबकने को!

जानती हूँ,
जब तुम दुबारा जीत जाओगे ,
अगली बार जब तुम मुस्कुराओगे,
तुम नहीं याद करोगे मेरा नाम....

दोस्त, पर ये याद रखना
समय का चक्र चलता रहता है,
बुरा वक़्त फिर से आये तो,
बिन बुलाये मुझे,
वही आस-पास पाओगे!

बुरा तो लगेगा बहुत,
जब यु मुस्कुराके भूल जाओगे...
पर फिर भी सब्र करना सिखा है
थोड़े में जीना सिखा है!

इंसानियत और अपनेपन का पाठ
ज्यादा पढ़ लिया था
बालपन में,
जब कोई नहीं आएगा पास तुम्हारे,
तब मेरे पास आना तुम......:)

गूंज झाझारिया

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गुरुवार, नवंबर 24

बस जीते जाओ

मेरा जीवन बन गया बंजारा,
जैसे बिन अपनों के कोई टुटा सितारा...

नयी पीढ़ी का मैं खिलता फूल ,
तो पुराने ज़माने का पका हुआ फल,

कैसे न जिउ अपनी इच्छा .?
कैसे भूल जाऊ फिर जिम्मेदारी...

पिस गया है मेरा मन..
जर्जर हो गयी इच्छाए!

माँ-पापा का सपना बनू?
या फिर जता दू मेरी भावना...

बहुत जिया उनके लिए,
बहुत उनका सपना बनी मैं>>>

न उनका मन भरा,
न कभी तृप्त हुई उनकी प्यास...

बढती गयी उनकी आस,
और बटता गया मेरा जीवन!

फिर भी कभी न सराहा मुझे,
कभी न महसूस किया मेरा प्रयत्न ..

उनकी बेटी बनने को,
छोड़ा सब साथ
संग-सहेलियों का,
न जाना उन्होंने मेरे अकेलेपन को,
और बस
आरोप लगाये हमेशा...कैसे न जिउ अपनी इच्छा .?
कैसे भूल जाऊ फिर जिम्मेदारी...

पिस गया है मेरा मन..
जर्जर हो गयी इच्छाए!

हर दम पाठ पढ़ाती मैं
सबको सीख सिखलाती मैं,
बनना अपने माँ-बाप का सपना तुम!

पर कैसे ये सच जुठ्लाती मैं ?
माँ-बाप अगर नहीं समझे तो?
कहा जाओगे फिर तुम,
किसे अपना बताओगे?
नहीं है इसका कोई जवाब मेरे पास!
आज बस राह नजर आती है,
जिसकी कोई मंजिल ही नहीं है!

बस चलते जाओ,
बस चलते जाओ,
बिना किसी आस के,
बिना किसी स्वप्न के बस जीते जाओ!
जीते जाओ!


गुंजन झाझारिया!





लेबल:

रविवार, नवंबर 20

किनारे आ गयी 
समंदर की प्यारी लहरे ..
अब रेत कुरेदना ना गलती उनकी..
ढूंढ़ रही हैं अपने बोये सीप, और मोती!
अनजान सी दुनिया उनके लिए है>>>
हर एक आवाज "गुंजन" उन 
बातो का फ़साना कहती है!!!

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बुधवार, नवंबर 9

टिप्पणियों का इंतज़ार

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गूंज***