बुधवार, मार्च 19

गूँज की शायरी

1)मुझे भाती नहीं हैं मुस्कुराहटें,
कि 'गूँज'आजकल,
नकल-असल में फर्क नहीं।

2)दुआएं जो असरदार होती,
ए-माँ आज,
'गूँज' तेरी मालामाल होती।

3)नियम कायदों में क्या रखा है,
कि 'गूँज'
कतार बनाकर चलना,
भेड़ भी जानती है।

4) जवाब देना ना आये तुझे,
दुनिया दूसरे दिन गायब कर दे,
जो सही जगह पर मिले छुपा,
'गूँज' वो पत्थर नायाब कह दे।
© गुंजन झाझारिया

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गुरुवार, मार्च 13

कुछ तुम कम अक्लमंद हो,
कुछ हम जताते कम हैं,
इसलिए तो,
तुम बोलते चले जाते हो,
जब हमारा कद देखते हो,
और हम मौन पी जाते हैं,
जब तुम्हारा कद देखते हैं।
© गुंजन झाझारिया

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तिरस्कारित होने पर उसी से सम्मान जीतने का जज़्बा रख,
तिरस्कार के बदले तिरस्कार,
बुद्धिहीन आदत,
तू ना रख,
सम्मान लेने का जूनून,
स्वादिष्ट व्यंजन की सुगंध जैसा,
पक जायेगा जब,
तृप्त होगी आत्मा कहकर,
चख,
ज़रा चख,
और चख।।।
© गुंजन झाझारिया

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मंगलवार, नवंबर 26

कह दो अपनी सरहदों से,
रोकें ना वो मेरी रूह को।।
उसका आना तुम्हारे पास,
तय है,
सृष्टी के निर्माण के जैसे।।

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शनिवार, सितंबर 29

एक पतली डोरी/
एक छोटी सी गांठ/
एक हिस्से तुम/ 
एक हिस्सा मेरे नाम/
कहे लोग गांठ लगे तो मन मैला हो जाय/
कहू मैं/
जो बीच हमारे धागा ही ना रह जाय/
इधर तुम पकडे चले आओ/
उधर मैं खिची चली आऊ/
मिल जायेंगे जहाँ गाँठन रह जाय..
छोड धागे को एक हो जाएँ/
ना धागा टूटे, ना गांठ की फिक्र सताए/
धागा तो बस मिलन की राह दिखाए/
प्रेम हो जाए इतना हरा...
गाँठन छोड डोरी तक की जगह ना रहने पाए/

गुंजन झाझारिया

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गुरुवार, सितंबर 20

घूंट घूंट पीती जिंदगी


तितलियों के पंखों में कैद मुस्कराहट तुम्हारी...
पीछे भागती उसके चाहत हमारी!

जुगनू जैसी रौशनी मे चमकती आंखे तुम्हारी..
छूने उसको पानी में दौड़ती नियत हमारी!

भवरों की गुनगुनाहट में छिपा संगीत तुम्हारा,
"गुंजन" बोल बुनती ख्वाहिशें हमारी!

हरी दूब की ओस में बैठी ठंडक तुम्हारी,
उसे हौले-हौले खुद में उतारती सुबह हमारी!

झरनों के झागों में बनती बाते तुम्हारी,
खिलखिलाकर तैरती दुनिया हमारी!

चाय में अदरक जैसे कड़क आवाज़ तुम्हारी,
उसे घूंट घूंट पीती जिंदगी हमारी!
©  Gunj Jhajharia

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मंगलवार, सितंबर 4

वो और होंगे


चुटकियों में बातें उड़ाने वाले कोई और होंगे..
हमें तो बवंडर में भी बाते उड़ाना नहीं आता...

झूठ बोलकर कसम खाने वाले कोई और होंगे..
हमें तो सच बोलकर कसम खाना गंवारा नहीं लगता..

दूसरों की नाकामयाबी पर हसने वाले कोई और होंगे,
हमें तो खुद की कामयाबी पर हँसना नहीं आता..

वो और होंगे,
जो जलते हैं भुट्टे की तरह रात दिन..
हमें तो भुट्टों को जलाना भी नहीं आता...:))

copyright गुंजन झाझारिया "गुंज"

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शुक्रवार, अगस्त 24




स्वप्न के धरातल पर चाहे जितने कंकड आयें..
मुझे बस चलते जाना है..
सुना है कहीं दूर, इसी राह पर परियों से सामना होता है...
मुझे बस चलते जाना है....

copyright-गूंज झाझारिया 

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खुरचे पत्थर भगवान बने,
रेत के टीलो से इंसान बने..
जो हो जूनून कर गुजरने का,
ठोकर भी सम्मान बने..
copyright Gunj Jhajharia

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हाथ जोड़कर प्रणाम करें, 

पैर पड़कर नमन करे..
ना भाए कोई भी सम्मान,
जब अभिवादन दिल से कोई ना करे...:)

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भीतर-२ एक लौ जल रही थी बरसो से,
आज उसकी रौशनी चहुँ ओर चमकती दिखाई दी..
अपने जैसा ही संसार को पाया मैंने...
दुनिया मेरी परछाई सी बनती दिखाई दी..:)
copyright-गुंज झाझारिया

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ना "बस काटना" है तुम्हें, ना अंधेरों में खोने देंगे..
यूँ ना टुकडो में बिखरेंगे तुमको-ए-जिंदगी,
तुम्हें मुस्कुराहटो पर सजा कर रखना है....:)

copyright-गुंजन झाझारिया "गुंज"

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दिल को ऊँचाइयाँ बहुत भाती हैं..
हम हैं कि उसे गुलाम बनाये फिरते हैं....!
ना उड़ने देते. ना झूमने देते ..
उसे किसी और के लिए पैगाम बनाए फिरते हैं..!!



                                                            copyright-गुंजन झाझारिया "गुंज"

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सोमवार, दिसंबर 5

उस चोट ने बचकर चलना सिखाया मुझे,
अब जब जीतती हूँ हर एक बाज़ी "गूंज"
लोग मुझे 
चालबाज़ कहने लगे हैं!

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रविवार, नवंबर 20

किनारे आ गयी 
समंदर की प्यारी लहरे ..
अब रेत कुरेदना ना गलती उनकी..
ढूंढ़ रही हैं अपने बोये सीप, और मोती!
अनजान सी दुनिया उनके लिए है>>>
हर एक आवाज "गुंजन" उन 
बातो का फ़साना कहती है!!!

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बुधवार, अगस्त 24



नादाँ थे हम,जो बेफिक्र बैठे थे,
जब बोये जिंदगी भर फूल है
तो कांटे क्यों काटेगे?

ग़लतफ़हमी थी हमारी "गुंजन",
यहा अपनों का बोया भी काटना
पड़ता है!-----------G.J

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वक़्त का बदलता रूप तो देखो "गुंजन"
वो बात करने लायक नहीं समझते आज
जो कभी हमराह कहा करते थे!!!
----------------------G.J.

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मैंने कब कहा उनसे कोई गिला नहीं है!
मगर बात कुछ ऐसी है  "गुंजन",
जब-जब देखा आँखों में उनकी,
सच का सैलाब नजर आ गया!
--------------------------G.J.

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गुरुवार, जून 9

कही रौनक, कही अँधेरा!!!
कही सन्नाटा शाम का,
तो कही है सवेरा!!!
हर एक मोड़ पर नया रंग,
जैसे जंगलो में
मन बदलता हो कोई बघेरा!!!
बचना सीख ले,
चारो ओर आग का ताव !!!!!
रख हिम्मत,
चाहे धुप हो या छाव!!!!
@G.J.

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शनिवार, जून 4

होगी काली रात उनके लिए,
जिन्हें सपने देखना नहीं आता..
मेरे लिए तो "गुंजन",
ये रंगीन रौशनी वाली बारात जैसी है..!!!
स्वागत बारात का करना अच्छा लगता है,
हर उस रात के सवेरे से
नए जीवन की शुरुवात करना अच्छा लगता है!!!
शुभ-रात्रि मित्रो..
G.J.

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