शनिवार, अप्रैल 23

तरक्की इससे बढ़कर क्या होगी दोस्तों,
मेरे देश में इमानदारी भी
बिकती है हर नुकड़ की दुकान पर ....
G.J.

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गर हो राह में काटे तेरे, पत्थर बरसते हो हर पल
समझ लेना दोस्त मेरे,
नेकी की राह पर चलने लगा है तू इन दिनों..
.

G.J.

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जीवन का पहला दिन और तेरा साथ

भयभीत, अचंभित 
जीवन का पहला दिन!!

बाहर का प्रकाश 
चुभ न जाये कही,
इस कोमल शरीर को
तेरी छाया की जरुरत है,
बस तू जानती थी माँ.


तू जब काम पर जाती थी,
शब्द नहीं थे,
पर अपने रुदन से
"ना जा " 
कहना चाहती थी
बस तू जानती थी माँ.


सिखाई तुने जब आँखों की 
भाषा
क्या है मेरे मन में तेरे लिए
ये जानना चाहती थी 
परन्तु उस बातचीत में
बड़ा सुख मिलता था 
बाल मन को,
बस तू जानती थी माँ


दूर से जब आती दिखाई देती,
लड़खड़ाते कदमो से गिर जाती,
दो कदम और चल सकती थी,
पर तेरी गोद 
में आना की जल्दी थी,
बस तू जानती थी माँ.


मालिश करती, नहलाती,
काजल का टीका लगाती,
the most beautiful women i have ever seen
फिर निहार कर खुद ही मुस्कुराती,
पानी और साबुन से खेलना 
भाता था मुझको
बस तू जानती थी माँ


"मी " 
बोला जब पहली बार,
मम्मी कह कर पुकारा था,
बस तू जानती थी माँ


"घर- घर" खेलने में
जब रात हो जाती थी
दरवाजे पर तू,
हाथ में छड़ी लिए दिखाई देती
तेरी वो मार कई मात से बचाएगी
बस तू जानती थी माँ


मेरे हाथ पर
मेहंदी का रुपया बनाकर 
मुझे अपने हाथ से खिलाती थी,
भाई के सो जाने पर
जब मेरे पास सो जाती 
अबोध मन को 
नींद में भी तेरी राह है,
बस तू जानती थी माँ


मेरी हर जिद में,
हर इच्छा में 
तेरी हाँ की जरुरत है
कैसे पापा से
सिफारिश करनी है,
बस तू जानती थी माँ.


आज बरसो बाद
जब पड़ोसन ने कहा
आपके चेहरे पर झुर्रिया
आ गई हैं,
मेरे लिए जीवनसाथी
खोजने की परेशानी में
आई सलवटे हैं वो,
बस तू जानती थी माँ


ना जाने कितने जूठ बोले
हैं तुझसे,
आँखों की भाषा में 
निपुण तू,
खुलासा करके कही 
मेरे सम्मान को चोट ना आये,
तुझे मालूम है,
ये मुझे ना बताया 
बस तू जानती थी माँ


 आज उम्र हो गई है,
परन्तु मेरा मन 
बालक है,
आज भी डर है उसी 
धुप से झुलसाने का 
इसी वजह से रोज
लडती है,
हर रोज काम करते-करते
मेरी याद में तेरी आंखे 
गीली हो जाती हैं
जीवन के पहले दिन की 
तरह..
तेरी छाया की जरुरत 
अब भी है 
 बस तू जानती है माँ  

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बधाई हो दोस्त तुम्हे जन्मदिन की.


चमकना है अभी बाकी,
 चोंकाना अभी है बाकी
बधाई हो दोस्त तुम्हे,
जन्मदिन की,
चहचहाते रहो युही तुम,
बहुत कठिनाइयों से लड़ना 
अभी है बाकी,
बस नहीं चलता हमारा
रोक सके जो 
किसी पत्थर को राह में आने से,
तुम्हारा बस हर पत्थर से 
सफलता की कहानी 
लिखना अभी बाकी है,
बधाई हो दोस्त तुम्हे 
जन्मदिन की.
G.J.
for my two friends
ankit mathur and puja ........may god bless you a rocking life..

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शुक्रवार, अप्रैल 22

धन्यवाद..

कुछ कहना था तुमसे ,
धन्यवाद...


मेरी दुनिया में पैर ज़माने के लिए,
मेरी अन्दर सोये पड़े,
बालक को जगाने के लिए.


मेरी हर टूटती साँस को सहलाने के लिए,
मेरी इच्छा का कद,
बढ़ाने के लिए.


मेरे अन्दर झांक  कर 
मेरी खूबियाँ 
मुझे ही बतलाने के लिए..


कुछ कहना था तुमसे,
धन्यवाद.




अनगिनत बार सोचा 
कह नहीं पाई,
अपनी जिद छोडना
पसंद नहीं था न.


मगर कुछ कहना था तुमसे,
धन्यवाद


मैं जिद्दी हूँ,
ये मनवाने के लिए.
खामिया बहुत हैं मुझमे,
मैं कोई परी नहीं,
ये स्वीकार करवाने के लिए.


समझाया तुमने मतलब
 माफ़ी का 
तुमने ही तो वास्तविकता से
हाथ मिलवाया था.


छोटी हो या बड़ी,
चाहे दूर जाने की हो या
न लौट आने की,
चाहे नहीं माफ़ करने की
या नहीं साथ देने की


हर बात को धर्य
से बतलाने  के लिए.


कुछ कहना था तुमसे 
धन्यवाद.


जाते जाते भी दुनिया की रीत
दिखलाने के लिए,
उम्र भर की
सीख सिखलाने के लिए


माँ-पापा ने बहुत कोशिश 
की थी
तुम बड़ी हो गयी,
समझने की.


कुछ कहना था तुमसे 
धन्यवाद 
मुझे एक ही पल में 
सयानी बनाने के लिए.


सवाल कई थे,
भ्रम भी 
पाले थे,
यूँ ही हवा के जैसे 
छु कर चले जानने का
तरीका तुम्हारा तो नहीं था,
अनुमान कई लगाये थे,


पर कहना सिर्फ इतना ही था..........
उन ख़ूबसूरत पलों 
में साथ देने के लिए 
धन्यवाद.........
 कुछ कहना था तुमसे,
धन्यवाद...




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ठोकरे तो मैंने भी मारी है राह पड़े कंकडो को,
कोई पत्थर उसमे भी कीमती रहा होगा.

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यू तो हम भी नाचे थे सारी रात,
चोटो का अहसास तो 
नशा उतरने के बाद हुआ है ...

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काश मैं ऐसा पहले समझ जाती.......................................



हर एक टूटती लकीर में 
हर एक जुड़ती तकदीर में
काश को देखा मैंने.

काश के मुझे वो गुडिया मिल जाती,
काश के मेरे बाल भी लंबे होते 
काश मैं भी चुटिया बना पाती,
काश मैं माँ जितनी बड़ी होती 
काश मैं भी साडी पहन पाती.
छोटी छोटी आँखों में 
उम्र के साथ
काश को पलते देखा,
इस बढ़ते कद के साथ 
काश को बढ़ते देखा 

काश मेरी लिखाई 
मेरी दोस्त से सुन्दर हो जाती,
काश आज मैं थोडा पढ़ आती 
काश मेरे पास वो पेन्सिल
होती
काश भैया मुझे अपने साथ खेलने देता
काश मेरी भी कोई बहन होती.

हर एक मोड़ पर सपनो का
हकीकत से फासला,
लम्बा होता रहा
और काश
फलता फूलता रहा.

काश मैं प्रथम आ गई होती
काश मेरी स्कूल बस 
हरी वाली होती.
या काश
मेरी दोस्त का घर 
मेरे घर के पास होता.

धीरे धीरे काश ने घेर लिया यूँ 
काले नाग ने 
अपने फन में जकड़ा हो ज्यूँ 

काश वो लड़का मुझसे 
बात कर ले
काश माँ पापा
को मना ले.
काश भाई मुझे 
माँ के गुस्से 
से बचा ले .

काश मुझे अच्छा कॉलेज मिल जाये,
काश मेरी अच्छी  जॉब लग जाये,
काश मैं वो ड्रेस ले पति
काश मैं वो गाड़ी चला पाती. 
काश मेरे पुराने दोस्त साथ होते,
काश मैं माँ जितनी सुन्दर होती .

बसंत में 
खिलते फूल की तरह 
जब खिली मैं कलि
पापा के आँगन की
उस पौधे के साथ
काश नाम का घास 
भी बढ़ता रहा
सुन्दरता, और छवि 
छुप गई घास में
और दुनिया का 
वो खुबसूरत नजारा 
कही चुप सा गया .

काश बसंत आ जाये
काश पानी बरसे,
काश गुंजन गुनगुनाये
काश पपीहा
गीत सुनाये.
काश को देखते 
और जपते 
ही पूरा बसंत चला गया 

न बरसा बादल देखा 
न भवर पहुच
पाया फूल तक
न कोयल की कूक 
सुनाई दी
न खुशबू
फैली बगिया तक 

काश ने रंग डाला 
सारा आकाश मेरा
धूमिल सा लगने लगा
हर रंग तेरा

अब उस पट्टी की
गांठ ढीली होने लगी है
हलकी सी रौशनी अब 
घास को भेद कर 
फूल तक पहुचने लगी है
अब उम्मीद है,
बसंत आयेगा
और 
कोयल गाएगी 
इस फूल की मुस्कान 
में और फूल भी खिल जायेगे
और बगिया में बहार 
छाएगी.

अब जाकर  मुझे
काश और उम्मीद का फर्क दिखा है
अब जाकर
वर्तमान में सब मिलता है
वाक्य का 
अर्थ समझ आया

अब उम्मीद है
मुझे जो मिलेगा
मैं उसमे खुल 
कर साँस लूगी
और हर पल का 
आनंद लूगी...
काश मैं ऐसा पहले समझ जाती.................................................

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