गुरुवार, जून 9

कही रौनक, कही अँधेरा!!!
कही सन्नाटा शाम का,
तो कही है सवेरा!!!
हर एक मोड़ पर नया रंग,
जैसे जंगलो में
मन बदलता हो कोई बघेरा!!!
बचना सीख ले,
चारो ओर आग का ताव !!!!!
रख हिम्मत,
चाहे धुप हो या छाव!!!!
@G.J.

लेबल:

शनिवार, जून 4

पंछी-ओ-पंछी


पंछी-ओ-पंछी 
मेरे पास तो आ,
यूँ दूर दूर न उड़ता जा ,



पंछी-ओ-पंछी ,
मेरे पास तो आ,
मुझे तुझसे दोस्ती करनी है!!
जानना है तुझसे.
कहा से सीखी तुने 
तिनका तिनका चुग कर
घोसला बनाने की कला?
कैसे तू आसमान वाले 
रस्ते याद रख पाता है?
तेरे इतने सुन्दर रंगीन पंख,
कहा से आये है?

पंछी-ओ-पंछी,
तनिक बात तो सुन!!मुझे भी सीखनी है, 
तेरी फुर्र से उड़ जाने की कला!
तू है क्यों इतना हल्का,
कि हवा के साथ ऊड जाता है,
या पवन से तेरी दोस्ती है  क्या?

दूर दूर से बोला वो,
न ही दोस्ती की कोई पवन से,
न ही मैं कोई कला सीखी है कही 
से,
मैं तो प्रकर्ति का प्रेमी हु,
आसमान का रास्ता
याद कहा रखना पड़ता है?
साँझ होते ही पवन बतला देती ह
राह मुझको,
दोस्त तो तुम भी थे मेरे,
परन्तु  अब तक न जाना किसी इंसान को,
भारी और हल्के की बात नहीं है,
वजन तो तेरा भी कुछ खास नहीं है,

लेकिन तू भारी है,
तेरी सोच से,
तेरे कर्म से, 
तेरे धर्म से,
 












तुझे राह इसलिए नहीं दिखती है,
क्युकी तुने प्रकृति से नाता तोड़ लिया है,
तेरे साथ बंधा था,
बुधि का बंधन 
तुने अहम् से उसको भी छोड़ दिया..

अब मेरे पंख रंगीन हैं,
और मैं उड़ता हू...
और डर है तेरा मुझको,
क्युकी तू अंग नहीं है मेरी प्रकृति का,
और मैं बस प्रकर्ति का साथी हूँ,
तेरा मेरा कोई मेल नहीं है...

पंछी-ओ-पंछी
मेरे पास तो आ,
यूँ दूर दूर न उड़ता जा ,

मुझे तुझसे दोस्ती करनी है...:(

@ Gunjan Jhajharia

लेबल:

होगी काली रात उनके लिए,
जिन्हें सपने देखना नहीं आता..
मेरे लिए तो "गुंजन",
ये रंगीन रौशनी वाली बारात जैसी है..!!!
स्वागत बारात का करना अच्छा लगता है,
हर उस रात के सवेरे से
नए जीवन की शुरुवात करना अच्छा लगता है!!!
शुभ-रात्रि मित्रो..
G.J.

लेबल:

जानते हैं "गुंजन",
एक-टक देखने की कला में वो भी माहिर हैं,
बस उनकी नजर चुभ न जाये हमे,
तभी आजकल आँखे चुराते फिरते हैं!!!!!!!!!

G.J.

लेबल:

बड़े सपने , बड़ी इच्छा,
बड़ी इच्छा, बड़ा प्रयत्न ,
बड़ा प्रयत्न, बड़ी सोच,
बड़ी सोच, बड़ी दुनिया,
बड़ी दुनिया, बड़ी हस्ती,
बड़ी हस्ती, बड़ा पैसा,
बड़ा पैसा, बड़ा दान,
बड़ा दान, बड़ा इंसान ..........
"कमाया कर्म, किया दान,
काटा दुःख , बांटा ज्ञान,
संतोष किया और बना महान..."
G.J.

लेबल:

जियो जब तक जिन्दा हो,
न मुर्दों की तरह रहो तुम,

अर्ज किया है"गुंजन" ,
कि राह में वाले पत्थर से भी
हम तो घर बना लिया करते हैं!!!!
G.J.

लेबल:

संसार.............


अपनी ही धुन पे सवार,
किसी और के प्यार पर  निसार,
अपना साहस, अपना हथियार,..मीठी सी सुगंध के साथ ज्यू हो 
हल्की सी बयार,
एक अकेले का बाज़ार!

मासूम मन का सुन्दर सा संसार!!!

सब रंगों से परे एक नए रंग में होता हैं,
सारी लोरिया छोड़ अपने राग में सोता  हैं....बिन तूफ़ान के राह चलते खोता है.....
हथेली में कम पड़ जाये लकीर,
तो कभी आँखों से निकलते मोती की धार 
,और 
कभी गालों पर गिरती मुस्कान जोड़ लेता  हैं....

जीते हुए मन का ईनाम सा संसार!!!

 
कुछ-एक पंछी जमीन पर चलते हैं,..
हर मछली को पीछे छोड़ 
कुछ सांप पानी में भी रहते है...
आस-पास
सब एक जैसे न हो,
तो भी क्या? 
अजूबे से मन का अलबेला सा संसार !!!

पांव पड़े धरती पर, 
लगा उसे इसी आहट का अहसास था..
साँस ली तो हवा पर
इसी का नाम सवार था..
देखते ही खिल गए हैं फूल..
भवरे को भी यही इंतज़ार था..
सूरज तो पड़ गया हैं हल्का,
चाँद अपनी ऊंचाई पर है,

स्वप्न से मन का बोलता सा संसार....

सफ़ेद कागज पर स्याही की बूँद ,
रेखाओ में चेहरा दिखता,
कही पानी से भरा बादल,
और कही 
देखा बिजली को 
चीखता,

इन सब के बीच गुनगुनाते मन  का  " गुंजन " सा  संसार..............

@copyrightGunjan Jhajharia 

लेबल:

हाँ भई


कड़कते कागज के टुकड़े,
भीनी-सी उनकी सुगंध,
किसी पर मुस्कुराता चेहरा,
किसी में हरयाली बंद,

लेकिन कीमत तो उस पर छपे 
अंक की है.....!!!

पहचान तो गए हो न??
हाँ भई,
ये रुपया है,

तेवर इसके अलग ही हैं,
जितना आये, और लालसा बढती जाए 
न हो तो,  रातो की नींद उडाये
गधे को भी बाप बनाये 

हाँ भई,
ये छुआछुट की बीमारी है!!!

तेरे पास है, 
मेरे पास भी होना चाहिए 
तू खिलाये 
मुझे जरुर खाना चाहिए,
कही से भी लाऊ,
पर रुपया मुझे तुझसे ज्यादा  चाहिए!!!

हाँ भई,
ये ईमान का दीमक है!!

सरे काले कर्म करवाए!!
तराजू के आगे भी,
पक्षपात दिखाए!!
अपनों का ही 
ह्रदय बिकवाये!!!
और फिर,
पाप पर पर्दा डालने के भी 
रुपया ही तो काम आये!!!

हाँ भई,
भावनाओ का खंजर है ये,

अपने ही बाप को
वर्द्ध आश्रम भिजवाए,
अपने बालक का बचपन 
देखने को तरसाए,

अपनी अर्धांगिनी 
को जिन्दा जलवाए....
इंसानियत का रोज 
फुटपाथ पर तमाशा बनवाए...

हाँ भई,
जो भी हो,
प्रतिष्ठा का सूचक ह ये,
बड़ी बड़ी गद्दी पर बिठाये,
चमचो की लाइन लगवाए,
हर एक भूल को माफ़ करवाए,
हर अपने को करीब लाये,
दोस्तों का मेला लगवाए,
सभी को 
ये रुपया भाए..


लक्ष्मी पूजन करवाऊ मैं,
आँगन में रंगोली सजाऊ,
दीपक से घर जगमगाऊ,
द्वार पर निम्बू लटकाऊ,

हाँ भई,
अब तो रुपया आना चाहिए..

कड़कते कागज के टुकड़े,
भीनी-सी उनकी सुगंध,
किसी पर मुस्कुराता चेहरा,
किसी में हरयाली बंद,

लेकिन कीमत तो उस पर छपे 
अंक की है.....!!!

हाँ भई ,
अब तो रुपया आना चाहिए...




लेबल:

राही,



जब - जब समक्ष कठिनाई हो,
तू मोहक मुस्कान दिखाना उसको !!!
जब भी रडके कंकड़ चक्षु में,
तीसरी आंख खोल दिखाना जग को !!!!!

अल्हड- मोहक मुस्कान दिखा,
बस चलते रहने में भलाई है!!!
चलता नहीं रुकने का कोई नाम यहाँ,
ये इस राह की सचाई है!!!

झपक मत लेना पलको को,
यहा चूक पराजय कहलाती है!!
ढलता दिखा जो सूर्य, 
साँझ मत समझना उसको,
वो तो परीक्षक ने भटकाने की
चाल चलाई है!!!

न लेना रुकने का कोई नाम यहाँ,
ये इस राह की सच्चाई है!!

बैठा मिले कोई साथी राह में,
कहना राह लम्बी है,
साथ देने को बुलाना उसको,
किन्तु ,
तू न ठहर जाना ,
जान ले अभी भी,
इस बात में बड़ी गहराई है!!

न लेना रुकने का कोई नाम यहाँ,
ये इस राह की सच्चाई है!!

धीरे चलना धीरे चलना,
धीरे धीरे चलते रहना,
तेज दौड़ने में भी यहाँ 
बुराई है!!!
कंठ सूखे कभी राही,
तो ढूँढना मत किसी जलाशय को,
ये बस समय की बर्बादी है!!

बरसेगा मेघ तेरी प्यास तृप्त करने को,
हर एक सच्चे राही की पीठ 
उसने थपथपाई  है!!!

न लेना रुकने का कोई नाम यहाँ,
ये इस राह की सच्चाई है!!एक और नियम है इस राह का,
ध्यान न करना बीते किसी चौराहे का!!
मन में मत लाना किसी बिछड़े राही की बात!!!

जो गए तुझसे पहले ,
उनके पदचिन्हों को पढ़ते रहना!!
उनकी हार में तेरी जीत छुपी है,
बस ढूँढना ही तेरी कठिनाई है!!!

है मुमकिन इस रस्ते के पार जाना भी ,
खेल खेल में चलते रहना,
कंकड़ पत्थर से खेलते चलना,
फूल दिखे, मुस्कुरा जाना !!
बंजर दिखे , न डगमगाना!

जब पहुचेगा उस पार,
मुझे ऊपर से बतलाना  कि
कैसी लगती ऊंचाई है??????

राही,
चलता नहीं रुकने का कोई नाम यहाँ,
ये इस राह की सचाई है!!!
 @copyright-Gunjan Jhajharia

लेबल: